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UPSC-The Dark Inside (Hindi) By Luka Sharie

Original price was: ₹999.00.Current price is: ₹99.00.

UPSC की लिस्ट में सीटें भले ही लिमिटेड हों, लेकिन आपका टैलेंट बेमिसाल है। याद रखें, आप सिर्फ़ एक रोल नंबर या आंसर शीट नहीं हैं—आप एक ऐसी आग हैं जिसे कोई सिस्टम बुझा नहीं सकता।The Harsh Truth You Must Accept Before It’s Too Late.

लूका शरी: यह किताब लिखने का मकसद

“मैं, लूका शरी, इस किताब के ज़रिये आपको डराना नहीं, बल्कि उस सिस्टम से लड़ने के लिए तैयार करना चाहती हूँ जो आपको सिर्फ़ एक ‘रोल नंबर’ समझता है। मैं चाहती हूँ कि आप अपनी क़ाबलियत को सही वक़्त पर पहचानें, क्योंकि अक्सर जब तक हमें अपनी असली शक्ति का एहसास होता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। ⏳

यह एक सीरीज़ है जहाँ मैं आपको उस ऊँचाई तक पहुँचने का सही रास्ता बताऊँगी, ताकि आप ज़िंदगी के हर इम्तिहान में कॉन्फिडेंट रह सकें। 🏔️ याद रखिये, UPSC में सीट्स की गिनती कम हो सकती है, पर आपके टैलेंट की कोई गिनती नहीं है।”

ISBN- 978-93-5679-038-4

Description

यूपीएससी: द डार्क इनसाइड “क्या आप एलबीएसएनएए के सपने देख रहे हैं? या ‘सिस्टम’ के चक्रव्यूह में प्रशंसक चुक गए हैं?” यूपीएससी: अंदर का अंधेरा सिर्फ एक किताब नहीं है; ये वो शीशा (मिरर) है जो आज तक किसी कोचिंग इंस्टीट्यूट या टॉपर ने आपको नहीं दिखाया। ये कहानी है हमारी 0.02% सफलता दर के पीछे छुपे 99.98% “विफलताओं” की, जिनके आंसू कोचिंग के चमकदार पोस्टर के पीछे छुपे दिए जाते हैं। क्या किताब में हमने वो डार्क सीक्रेट्स खोले हैं जो आपकी रातों की नींद उड़ा देंगे- लेकिन शायद पहली बार, आपको अकेला महसूस नहीं होने देंगे। क्या किताब में क्या है? (अंधेरे के अंदर क्या है?)

सिस्टम का घोटाला: जहां एक उम्मीदवार ₹1.5 लाख की फीस भरने के लिए अपनी जमीन गिरवी रखता है, वहीं पूजा खेडकर जैसे लोग फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र और भाई-भतीजावाद के दम पर आपकी सीट खा जाते हैं। पढ़िये कैसे “राजकोट घोटाला” और “पेपर लीक्स” ने योग्यता का मर्डर किया है।

0.02% का गणितीय मर्डर: हर साल 10 लाख फॉर्म भरते हैं, पर सेलेक्ट होते हैं सिर्फ 1000। बाकी 9,99,000 का क्या? ये किताब बताती है कि कैसी ये परीक्षा सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक आर्थिक जाल बन चुका है।

दिमागी जंग : अवसाद, चिंता, और “लोग क्या कहेंगे” का दबाव। हमने बात की है उन 100+ एस्पिरेंट्स की जो हर साल सिस्टम से हारकर अपनी जान दे देते हैं। ये चैप्टर आपको बताएगा—आप अकेले नहीं हैं।भाषा और हिंदी मीडियम का दर्द: क्यों हिंदी मीडियम के छात्र टॉप 100 में सिर्फ 2% रह गए हैं? इंटरव्यू रूम के अंदर का वो सच, जहां आपके ज्ञान से ज्यादा आपके एक्सेंट और बैकग्राउंड को जज किया जाता है।

उम्मीद की किरण (बाहर का रास्ता): ये किताब सिर्फ समस्याएं नहीं गिनाती, ये समाधान देती है। 20 सुधारों की वो मांग जो सिस्टम को हिला सकती है, और उन लोगों की कहानियां जिन्होंने यूपीएससी छोड़ कर दुनिया जीत ली। ये किताब किसके लिए है? हमारे आकांक्षी के लिए जो 32 वर्ष की आयु सीमा के डर से रोज़ मरता है। हमारे परिवार के लिए जो नहीं जानता कि उनका बच्चा मुखर्जी नगर के बेसमेंट में कौन सी स्थिति पैदा हो रही है। और हर उस इंसान के लिए जो ये मानता है कि- “तुम उत्तर पुस्तिका नहीं, इंसान हो।” आज ही ऑर्डर करें. क्योंकि सच जानना आपका हक है, और इस सिस्टम से लड़ने के लिए “द डार्क इनसाइड” को समझना जरूरी है।

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